बिजली कर्मचारियों की हड़ताल से अंधेरे में डूबे कई गांव, आक्रोशित ग्रामीणों ने देर रात हाइवे पर लगाया जाम!
हरियाणा में बिजली विभाग के निजीकरण के विरोध में कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल के कारण जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया है। रोहतक के कई गांवों में ब्लैकआउट की स्थिति पैदा हो गई है!
रोहतक : हरियाणा में बिजली निगम के निजीकरण की तैयारियों के खिलाफ कर्मचारियों की 3 दिवसीय हड़ताल ने आम जनता की मुसीबतें बढ़ा दी हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली व्यवस्था पूरी तरह ठप हो चुकी है, जिससे नाराज होकर ग्रामीण देर रात सड़कों पर उतर आए और नेशनल हाइवे को जाम कर दिया।
अंधेरे में डूबीं गलियां, हाइवे पर घंटों ठप रहा चक्का
गांव कंसाला में सड़क पर उतरे लोग: गांव कंसाला के ग्रामीणों ने देर रात अंधेरे में डूबी गलियों और बिजली न आने से परेशान होकर हाइवे पर जाम लगा दिया। ग्रामीणों ने सरकार विरोधी नारे लगाए और करीब 1 घंटे तक यातायात ठप रखा। बाद में पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर किसी तरह समझा-बुझाकर जाम खुलवाया।
गांव घिलौड़ में बाइक खड़ी कर लगाया जाम: घिलौड़ गांव के लोगों ने नेशनल हाइवे पर सड़क के बीचो-बीच अपनी मोटरसाइकिलें खड़ी कर रास्ता पूरी तरह बंद कर दिया। इस दौरान सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी-लंबी कतारें लग गईं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और ग्रामीणों को आश्वासन देकर शांत कराया।
ग्रामीणों का दर्द: "इन्वर्टर-पानी की मोटरें बंद, अफसरों की कॉलोनी में लाइट"
हाइवे जाम कर रहे ग्रामीणों ने अपना रोष व्यक्त करते हुए कहा कि सुबह से ही बिजली की सप्लाई बंद पड़ी है, जिससे उनके दैनिक जीवन के सारे काम रुक गए हैं। पानी की मोटरें न चलने से पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। घरों के इन्वर्टर भी जवाब दे चुके हैं, जिससे पूरा गांव अंधेरे के आगोश में समा गया है। ग्रामीणों का आरोप है कि अधिकारियों की कॉलोनियों में तो 24 घंटे लाइट जल रही है, लेकिन आम जनता को जानबूझकर परेशान किया जा रहा है।
"यह तो सिर्फ ट्रेलर है, फिल्म अभी बाकी है": बिजली कर्मचारी संघ
हरियाणा बिजली कर्मचारी एवं इंजीनियर संयुक्त संघर्ष मोर्चा के लीगल एडवाइजर जगदीश निराला ने स्पष्ट किया कि यह 3 दिवसीय हड़ताल निजीकरण के विरोध में की गई है और इसके असर को लेकर प्रशासन को पहले ही सतर्क कर दिया गया था। उन्होंने चेतावनी दी कि अगर सरकार ने अपनी नीतियां नहीं बदलीं तो यह हड़ताल अनिश्चितकालीन हो सकती है, जिसकी पूरी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
वहीं सर्कल सेक्रेटरी सुनील दहिया ने सरकार पर आरोप लगाते हुए कहा: "हरियाणा सरकार नूंह और गुरुग्राम की बिजली व्यवस्था निजी हाथों में बेच चुकी है और अब पूरे प्रदेश के बिजली निगम को बेचने की तैयारी है। बिजली कर्मचारी नूंह और गुरुग्राम को भी निजी हाथों में नहीं जाने देंगे। अभी तो हमने सरकार को केवल ट्रेलर दिखाया है, मांगें न मानी गईं तो पूरी फिल्म दिखाई जाएगी।"




