रोहतक जिला परिषद में हाई-वोल्टेज ड्रामा: अविश्वास प्रस्ताव के दौरान 1 वोट रद्द, बाल-बाल बची वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा की कुर्सी
रोहतक जिला परिषद में वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव सोमवार को खारिज हो गया। बैठक में पहुंचे 10 पार्षदों में से एक का वोट तकनीकी कारणों से रद्द
रोहतक (हरियाणा): रोहतक जिला परिषद की राजनीति में सोमवार को उस समय एक बड़ा और अप्रत्याशित उलटफेर देखने को मिला, जब वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव तकनीकी पेंच में फंसकर गिर गया। वोटिंग के दौरान एक पार्षद का वोट अवैध (रद्द) घोषित होने के कारण विपक्षी गुट कुर्सी पलटने के लिए जरूरी दो-तिहाई बहुमत साबित नहीं कर सका। इस नाटकीय घटनाक्रम के बाद अनिल हुड्डा अपनी वाइस चेयरमैन की कुर्सी बचाने में कामयाब रहे।
क्या था सीटों और वोटों का गणित?
रोहतक जिला परिषद में कुल 14 पार्षद सदस्य हैं। नियमों के मुताबिक, वर्तमान वाइस चेयरमैन को पद से हटाने के लिए विपक्ष को सदन के दो-तिहाई सदस्यों यानी कम से कम 10 पार्षदों के समर्थन की आवश्यकता थी। सोमवार को जिला परिषद के सभागार में बुलाई गई विशेष बैठक में कुल 14 में से 10 पार्षद ही हिस्सा लेने पहुंचे, जबकि 4 पार्षद बैठक से पूरी तरह अनुपस्थित रहे।
1 वोट रद्द होते ही बदला पासा
बैठक में मौजूद सभी 10 पार्षदों ने वाइस चेयरमैन अनिल हुड्डा को पद से हटाने के पक्ष में मतदान करने का दावा किया था, जिससे विपक्ष की जीत तय मानी जा रही थी। हालांकि, जब मतों की गिनती शुरू हुई, तो चुनाव अधिकारियों ने पाया कि एक पार्षद का वोट तकनीकी रूप से त्रुटिपूर्ण था, जिसके कारण उसे नियमानुसार रद्द (Invalid) घोषित कर दिया गया।
इस एक वोट के निरस्त होते ही अविश्वास प्रस्ताव के पक्ष में वैध वोटों की संख्या घटकर केवल 9 रह गई, जो कि दो-तिहाई बहुमत (10 वोट) के अनिवार्य आंकड़े से एक कम थी। आवश्यक संख्या बल न मिलने के कारण चुनाव अधिकारियों ने अविश्वास प्रस्ताव को खारिज घोषित कर दिया।
विपक्ष का हंगामा, अनिल हुड्डा खेमे में जश्न
प्रस्ताव गिरते ही बैठक कक्ष के बाहर मौजूद अनिल हुड्डा के समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई और उन्होंने नारेबाजी कर जश्न मनाया। वहीं दूसरी ओर, विपक्ष के पार्षदों ने वोट रद्द किए जाने के फैसले पर कड़ी आपत्ति जताई और प्रशासन पर पक्षपात करने के आरोप लगाते हुए कुछ देर तक हंगामा भी किया। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि पूरी प्रक्रिया निष्पक्षता और चुनाव नियमों के कड़े दायरे में संपन्न कराई गई है। इस राजनीतिक ड्रामे के बाद रोहतक जिला परिषद की स्थानीय सियासत में गरमाहट और बढ़ गई है।




