दिवाली से एक दिन पहले क्यों की जाती है हनुमान जी की पूजा? जानिए इसका महत्व
छोटी दिवाली के दिन हनुमान जी की पूजा का विशेष विधान है। इस दिन बजरंगबली की आराधना करने से नकारात्मक ऊर्जा दूर होती है
रोहतक :- हिंदू पंचांग के अनुसार, दीपावली से एक दिन पूर्व (जिसे नरक चतुर्दशी, रूप चौदस या छोटी दिवाली कहा जाता है) हनुमान जी की पूजा करने की गहरी परंपरा रही है। धर्म जानकारों के अनुसार, इस दिन संकटमोचन की आराधना के कई बड़े और खास कारण हैं:
-
बाल रूप और जन्मोत्सव: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, कुछ क्षेत्रों में कार्तिक कृष्ण चतुर्दशी को हनुमान जी का जन्मोत्सव भी मनाया जाता है, इसलिए इस दिन उनके बाल रूप की पूजा करने से बल, बुद्धि और विद्या की प्राप्ति होती है।
-
नकारात्मक ऊर्जा से मुक्ति: नरक चतुर्दशी को नरक की यातनाओं और नकारात्मक ऊर्जाओं से मुक्ति पाने का दिन माना जाता है। हनुमान जी को भूत-प्रेत निवारक और संकटमोचन कहा गया है, जिनकी पूजा से घर की नकारात्मकता और बुरी बाधाएं दूर होती हैं।
-
शनि दोष से राहत: धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, दिवाली और उससे एक दिन पहले दीपक जलाने के साथ-साथ हनुमान जी की आराधना करने से शनि देव के दोष, साढ़ेसाती और ढैया के दुष्प्रभावों में राहत मिलती है।
-
राम दरबार की सुरक्षा: भगवान राम के परम भक्त होने के नाते हनुमान जी उनके आगमन और सुरक्षा के लिए सदैव तत्पर रहते हैं। यही कारण है कि दिवाली पर भगवान राम के स्वागत से पूर्व उनकी पूजा कर आशीर्वाद लिया जाता है, जिससे घर में सुख-शांति और समृद्धि बनी रहती है।
पूजा की विधि: इस दिन सुबह सूर्योदय से पहले स्नान करके हनुमान जी को सिंदूर, चमेली का तेल और लाल फूल अर्पित किए जाते हैं। इसके बाद बेसन या बूंदी के लड्डू और गुड़-चने का भोग लगाकर हनुमान चालीसा का पाठ किया जाता है।




