रोहतक में राज्य स्तरीय सांझी उत्सव का आयोजन, हरियाणवी लोकगीतों पर झूमीं महिलाएं

रोहतक में हरियाणा लोक कला संघ की ओर से राज्य स्तरीय सांझी उत्सव आयोजित किया गया। उत्सव में प्रदेशभर से आई महिलाओं ने दीवारों पर सांझी माता के चित्र बनाकर हरियाणा की पारंपरिक लोक कला को जीवंत किया।

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रोहतक में राज्य स्तरीय सांझी उत्सव का आयोजन, हरियाणवी लोकगीतों पर झूमीं महिलाएं

रोहतक में राज्य स्तरीय सांझी उत्सव का आयोजन, हरियाणवी लोकगीतों पर झूमीं महिलाएं

रोहतक। हरियाणा की पारंपरिक लोक कला और लुप्त होती सांझी परंपरा को पुनर्जीवित करने के उद्देश्य से रोहतक में हरियाणा लोक कला संघ की ओर से राज्य स्तरीय सांझी उत्सव का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में प्रदेश के विभिन्न स्थानों से पहुंचीं महिलाओं ने दीवारों पर सांझी माता के चित्र बनाकर हरियाणा की समृद्ध लोक संस्कृति को जीवंत किया। उत्सव में हरियाणवी लोकगीतों, पारंपरिक वेशभूषा और लोक नृत्य ने कार्यक्रम को खास बना दिया।

महिलाओं ने सांझी माता के चित्र बनाकर दिखाई कला

राज्य स्तरीय सांझी कला उत्सव में अलग-अलग स्थानों से आई महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। महिलाओं ने दीवारों पर सांझी माता के सुंदर चित्र बनाए और लोकगीतों के माध्यम से पुरानी परंपराओं को याद किया। कार्यक्रम का उद्देश्य केवल सांझी कला का प्रदर्शन करना नहीं, बल्कि नई पीढ़ी को हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत से परिचित कराना भी रहा।

कविता नांदल उर्फ मामन की बहू ने बांधा समां

कार्यक्रम में हरियाणवी लोक कलाकार कविता नांदल उर्फ मामन की बहू ने भी शिरकत की। उनके साथ पायल और अरुणा सहित अन्य सोशल मीडिया कलाकार हरियाणवी पारंपरिक परिधान में पहुंचीं। कलाकारों ने हरियाणवी लोकगीतों और नृत्य के माध्यम से दर्शकों का मनोरंजन किया। उनकी प्रस्तुतियों पर कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने उत्साह दिखाया।

कविता नांदल ने अपने देसी अंदाज में महिलाओं द्वारा बनाई गई सांझियों की सराहना की। उन्होंने कहा कि सभी महिलाओं ने बेहद सुंदर सांझी बनाई हैं। इस आयोजन में उन्हें भी नाचने-गाने का अवसर मिला। महिलाओं का हरियाणवी पारंपरिक कपड़ों में पहुंचना प्रदेश की पुरानी संस्कृति को फिर से जीवंत करने जैसा है।

लोक कला को जीवित रखने का प्रयास

कार्यक्रम के आयोजक हरविंद्र मलिक ने बताया कि सांझी उत्सव के माध्यम से हरियाणा की लोक कला और परंपराओं को जीवित रखने का प्रयास किया गया है। युवा पीढ़ी को अपनी संस्कृति के बारे में जानकारी होनी चाहिए, ताकि आने वाली पीढ़ियां भी इन परंपराओं को समझें और आगे बढ़ाएं।

उन्होंने बताया कि प्रदेशभर से आई महिलाओं ने सांझी माता के चित्र बनाकर इस आयोजन को उत्सव का रूप दिया। इस तरह के कार्यक्रम पारंपरिक कला को पहचान दिलाने के साथ-साथ लोगों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।

गढ़ी बोहर गांव की रहने वाली हैं कविता नांदल

हरियाणवी लोक कलाकार कविता नांदल उर्फ मामन की बहू रोहतक जिले के गढ़ी बोहर गांव की रहने वाली हैं। उन्होंने अपने सफर की शुरुआत भजन-कीर्तन मंडली से की थी। बाद में हरियाणवी लोकगीतों, शादी-ब्याह के मजाकिया गीतों और चुटीले किस्सों के कारण उन्हें सोशल मीडिया पर लोकप्रियता मिली।

कविता नांदल को उनके बेबाक बोलने के अंदाज और ठेठ ग्रामीण शैली के लिए पसंद किया जाता है। उनके भजनों और सांस्कृतिक कार्यक्रमों की मांग हरियाणा तक ही सीमित नहीं है। उन्हें दिल्ली, राजस्थान और उत्तर प्रदेश के विभिन्न जिलों में माता के जागरण और भजन संध्याओं में भी आमंत्रित किया जाता है।

नई पीढ़ी तक पहुंचे हरियाणा की सांस्कृतिक विरासत

राज्य स्तरीय सांझी उत्सव ने हरियाणा की पारंपरिक कला, लोकगीतों और सांस्कृतिक विरासत को सामने लाने का अवसर प्रदान किया। ऐसे आयोजनों के माध्यम से सांझी जैसी पुरानी लोक परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने और उन्हें संरक्षित रखने की दिशा में प्रयास किए जा सकते हैं।