छोटी दिवाली 2026: दीपों की रोशनी से जगमगाएंगे घर, जानिए नरक चतुर्दशी का महत्व और परंपराएं

दिवाली से जुड़ा महत्वपूर्ण पर्व छोटी दिवाली, जिसे नरक चतुर्दशी भी कहा जाता है, बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की विजय का प्रतीक है।

छोटी दिवाली 2026: दीपों की रोशनी से जगमगाएंगे घर, जानिए नरक चतुर्दशी का महत्व और परंपराएं

छोटी दिवाली का धार्मिक महत्व

दिवाली से एक दिन पहले मनाया जाने वाला पर्व छोटी दिवाली हिंदू धर्म में विशेष महत्व रखता है। इसे नरक चतुर्दशी और रूप चौदस के नाम से भी जाना जाता है। यह पर्व बुराई पर अच्छाई और अंधकार पर प्रकाश की जीत का संदेश देता है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इसी दिन भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी पत्नी सत्यभामा के साथ मिलकर राक्षस नरकासुर का वध किया था और उसके अत्याचारों से लोगों को मुक्ति दिलाई थी। इसी विजय की याद में नरक चतुर्दशी मनाई जाती है।

घरों की सफाई और सजावट की परंपरा

छोटी दिवाली के अवसर पर लोग अपने घरों की साफ-सफाई करते हैं और रंगोली, फूलों तथा रंग-बिरंगी लाइटों से घरों को सजाते हैं। शाम के समय मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। बाजारों में मिठाइयों, सजावटी सामान, दीयों और पूजा सामग्री की खरीदारी भी बढ़ जाती है।

विशेष पूजा और धार्मिक परंपराएं

इस दिन अभ्यंग स्नान यानी तेल से स्नान करने की परंपरा है। कई स्थानों पर यम दीपदान किया जाता है। भगवान श्रीकृष्ण और हनुमान जी की पूजा भी अलग-अलग क्षेत्रीय परंपराओं के अनुसार की जाती है।

पर्यावरण अनुकूल दिवाली मनाने की अपील

बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए लोगों को पर्यावरण के अनुकूल दिवाली मनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। फूलों और प्राकृतिक सामग्री से रंगोली बनाना, मिट्टी के दीयों का उपयोग करना, प्लास्टिक की सजावट से बचना और पटाखों का इस्तेमाल न करना बेहतर विकल्प हैं।

दीपों का त्योहार देता है सकारात्मकता का संदेश

दीपावली का अर्थ है दीपों की पंक्ति। दीपक ज्ञान, आशा, सुख-समृद्धि और सकारात्मकता का प्रतीक माने जाते हैं। छोटी दिवाली का पर्व लोगों को जीवन से नकारात्मकता दूर करके खुशियों और नई उम्मीदों के साथ आगे बढ़ने की प्रेरणा देता है।