साइलेंट किलर बन रही है 'ऑस्टियोपोरोसिस': मेनोपॉज के बाद महिलाओं की कमजोर हड्डियों पर विशेषज्ञों की चेतावनी, जानें कारण और बचाव
महिलाओं में उम्र बढ़ने और मेनोपॉज के साथ ऑस्टियोपोरोसिस की समस्या तेजी से बढ़ रही है। इस रोग में हड्डियां खोखली हो जाती हैं, जिससे हल्की चोट पर भी फ्रैक्चर का खतरा रहता है।
महिलाओं में उम्र बढ़ने के साथ जोड़ों, कमर और हड्डियों में दर्द की शिकायत आम होती जा रही है। चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, इसका सबसे बड़ा कारण ऑस्टियोपोरोसिस है। इसे 'साइलेंट डिसीज' के रूप में जाना जाता है, क्योंकि इसके कोई शुरुआती लक्षण दिखाई नहीं देते और मरीज को तब पता चलता है जब अचानक कोई हड्डी फ्रैक्चर हो जाती है।
क्यों होता है ऑस्टियोपोरोसिस?
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मेनोपॉज (रजोनिवृत्ति) और एस्ट्रोजन में कमी: मेनोपॉज के बाद महिलाओं के शरीर में 'एस्ट्रोजन' हॉर्मोन का स्तर तेजी से गिरता है। यह हॉर्मोन हड्डियों के घनत्व (Bone Density) को बनाए रखने में मुख्य भूमिका निभाता है।
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कैल्शियम और विटामिन डी का अभाव: शरीर में पर्याप्त कैल्शियम न मिलने और धूप की कमी से होने वाले विटामिन डी के अभाव के कारण हड्डियां अंदर से खोखली और कमजोर हो जाती हैं।
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शारीरिक गतिविधियों में कमी: खान-पान की अनदेखी और नियमित व्यायाम या वॉक न करने से हड्डियां अपनी मजबूती खोने लगती हैं।
पहचानें इसके प्रमुख लक्षण:
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कमर और पीठ के निचले हिस्से में लगातार तेज दर्द रहना।
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उम्र बढ़ने पर ऊंचाई का कम होना या रीढ़ की हड्डी का आगे की ओर झुकना।
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हल्की सी चोट, गिरने या यहां तक कि खांसने-छींकने से भी कलाई, रीढ़ या कूल्हे की हड्डी में फ्रैक्चर होना।
बचाव और रोकथाम के लिए विशेषज्ञों की सलाह:
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संतुलित खान-पान: आहार में दूध, दही, पनीर, हरी पत्तेदार सब्जियां और तिल जैसी कैल्शियम से भरपूर चीजों को शामिल करें।
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विटामिन डी और धूप: सुबह की हल्की धूप में समय बिताएं और डॉक्टर की सलाह से सप्लीमेंट्स लें।
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सक्रिय जीवनशैली: रोजाना हल्की सैर, योग या वजन उठाने वाले हल्के व्यायाम नियमित रूप से करें।
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समय पर जांच: मेनोपॉज के बाद महिलाओं को डॉक्टर की परामर्श से 'बोन मिनरल डेंसिटी' (BMD) या DXA स्कैन जरूर करवाना चाहिए ताकि हड्डियों की सेहत का समय रहते आकलन हो सके।




