रोहतक की सुनारिया जेल पहुंचे मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष: बंदियों की सुनी समस्याएं, मानवाधिकारों की रक्षा और व्यवहार में सुधार पर दिया जोर
अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्तरा और सदस्य दीप भाटिया ने रोहतक की सुनारिया जेल का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने बंदियों की समस्याएं सुनीं और जेल प्रशासन को उनके समाधान के निर्देश दिए।
रोहतक: हरियाणा मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्तरा व आयोग के सदस्य दीप भाटिया ने रोहतक की सुनारिया जेल का दौरा किया। इस दौरान उन्होंने जेल का निरीक्षण करते हुए वहां बंद बंदियों की समस्याओं को ध्यान से सुना और जेल प्रशासन के अधिकारियों को उन समस्याओं का त्वरित समाधान करने के कड़े निर्देश दिए।
मानवाधिकारों की सुरक्षा सर्वोपरि
आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति ललित बत्तरा ने निरीक्षण के दौरान कहा कि कारागार के निरीक्षण का मुख्य उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि जेल में बंद बंदियों के मानवाधिकारों का हनन न हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि सभी बंदियों को उनके तय मानवाधिकार मिलने चाहिए और किसी भी परिस्थिति में इनका उल्लंघन नहीं होना चाहिए। इसके अलावा, उन्होंने निर्देश दिए कि जेल में मासिक स्वास्थ्य जांच शिविरों का आयोजन नियमित रूप से हो, साथ ही महिला बंदियों के लिए हर 15 दिन के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ की विशेष सुविधा अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराई जानी चाहिए।
बंदियों से व्यवहार में बदलाव लाने की अपील
न्यायमूर्ति ललित बत्तरा ने निरीक्षण के दौरान बंदियों से सीधे संवाद किया। उन्होंने बंदियों को समझाइश देते हुए कहा कि वे अपने आचरण और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाएं तथा सजा पूरी होने के बाद जेल से बाहर जाकर एक अच्छी और सम्मानित जिंदगी जीने का संकल्प लें। उन्होंने भावुक अपील करते हुए कहा कि बंदी द्वारा की गई एक गलती की सजा केवल वही नहीं, बल्कि उनका पूरा परिवार भुगत रहा है। इसलिए वे भविष्य में अच्छे और सामाजिक कार्य करने का प्रण लें। उन्होंने जेल परिसर के भीतर बंदियों के मनोरंजन और ध्यान के लिए किए गए प्रबंधों की सराहना की।
कौशल विकास और आर्थिकी पर जोर
न्यायमूर्ति बत्तरा ने सजायाफ्ता कैदियों व बंदियों को प्रेरित किया कि वे जेल के अंदर रहकर विभिन्न प्रकार के कार्य करें, ताकि उनके द्वारा अर्जित आय से जेल से बाहर रह रहे उनके परिजनों को आर्थिक मदद मिल सके। उन्होंने बंदियों को कौशल विकास का प्रशिक्षण लेने के लिए भी प्रेरित किया ताकि रिहाई के बाद वे स्वरोजगार अपनाकर समाज की मुख्यधारा से जुड़ सकें।
दौरे के अंत में उन्होंने जेल की डिस्पेंसरी में उपलब्ध दवाओं की सूची और स्टॉक का निरीक्षण किया तथा विभिन्न वार्डों में उपचाराधीन बंदियों से मिलकर स्वास्थ्य सुविधाओं का फीडबैक लिया।




