हरियाणा सरकार में कैग ने ₹1495 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी:गेहूं तोल में ही पौने ₹3 करोड़ खर्चे, ठेकेदारों को ज्यादा पेमेंट, फेल प्रोजेक्ट पर करोड़ों फूंके

हरियाणा के सरकारी विभागों में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने 1495 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पकड़ी है। यह रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में पेश की गई। कैग की रिपोर्ट में बताया गया कि किस तरह अफसरों की लापरवाही से सरकार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और इनकम टैक्स का जुर्माना झेलना पड़ रहा है।

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हरियाणा सरकार में कैग ने ₹1495 करोड़ की गड़बड़ी पकड़ी:गेहूं तोल में ही पौने ₹3 करोड़ खर्चे, ठेकेदारों को ज्यादा पेमेंट, फेल प्रोजेक्ट पर करोड़ों फूंके

हरियाणा के सरकारी विभागों में भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (CAG) ने 1495 करोड़ रुपए की गड़बड़ी पकड़ी है। यह रिपोर्ट बुधवार को विधानसभा में पेश की गई। कैग की रिपोर्ट में बताया गया कि किस तरह अफसरों की लापरवाही से सरकार को नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) और इनकम टैक्स का जुर्माना झेलना पड़ रहा है। गेहूं को तुलवाने के लिए लाने-ले जाने में ही करीब पौने 3 करोड़ खर्च कर दिए गए।

यही नहीं, आढ़तियों को तय रेट से ज्यादा कमीशन बांटा गया। ठेकेदारों को प्रोजेक्ट कॉस्ट से ज्यादा पेमेंट की गई। ई–टेंडरिंग से बचने के लिए तक उसकी अमाउंट में हेराफेरी की गई। सरकार की आपकी बेटी-हमारी बेटी स्कीम में डबल आवेदनों को नहीं हटाया गया और LIC से 15 करोड़ से ज्यादा की पेमेंट करा दी गई। फेल प्रोजेक्ट पर भी अधिकारी करोड़ों रुपए फूंकते रहे।

सिलसिलेवार ढंग से जानिए, किस विभाग को अधिकारियों ने कैसे चूना लगाया...

  1. स्थानीय निकाय विभाग में 3 खामियां मिलीं 2. फूड एंड सिविल सप्लाई विभाग में 4 गड़बड़ियां पकड़ीं 3. महिला एवं बाल विकास विभाग फंड की बंदरबांट कर दी 4. सिंचाई विभाग में
  2. 2 गड़बड़ियां मिलीं लेबर विभाग में 731 करोड़ का फालतू इनकम टैक्स बना कैग ने लेबर विभाग में 'भवन एवं अन्य संनिर्माण विभाग में कर्मकारी के कल्याण' योजना का ऑडिट किया।
  3. इसमें 2017-18 से लेकर 2021-22 तक पांच सालों की जांच में बड़ी खामी मिली। दरअसल, इस दौरान विभाग को 2153.11 करोड़ रुपए का लेबर सेस कलेक्शन हुआ। मगर, अधिकारियों ने कुल फंड 5.553.71 करोड़ रुपए में से केवल 1,656.78 करोड़ (29.83%) का ही यूज किया।
  4.  बाकी पैसा विभाग के खाते में रहा, लेकिन समय पर इनकम टैक्स छूट के लिए आवेदन नहीं किया। जिस वजह से सरकार पर 713.25 करोड़ रुपए के इनकम टैक्स की देनदारी बन गई।
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