सिद्दीकी ने सियासी रसूख का फायदा उठा बनाई यूनिवर्सिटी:वाइफ, बेटी और दो भाइयों को बनाया ट्रस्टी, फाइनेंसियल फ्रॉड के भी आरोप लग चुके
दिल्ली ब्लास्ट में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन सामने आने के बाद अब इसके फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। जांच एजेंसियों की तरफ से खुलासा किया गया है कि यूनिवर्सिटी को संचालित करने वाली चैरिटेबल ट्रस्ट में सिद्दकी ने अपनी वाइफ
दिल्ली ब्लास्ट में फरीदाबाद की अल फलाह यूनिवर्सिटी का कनेक्शन सामने आने के बाद अब इसके फाउंडर जावेद अहमद सिद्दीकी भी जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। जांच एजेंसियों की तरफ से खुलासा किया गया है कि यूनिवर्सिटी को संचालित करने वाली चैरिटेबल ट्रस्ट में सिद्दकी ने अपनी वाइफ, बेटी और भाइयों को ट्रस्टी बना रखा है। साथ ही दुबई में रहने वाली एक रिश्तेदार भी ट्रस्टी है। यूनिवर्सिटी के संचालन में विदेशी फंडिंग के शक के चलते
अब ED फंडिंग पैटर्न की जांच कर रही है। कैंपस में पुलिस से लेकर एनआईए, एसटीएफ और एनएसजी के पहुंचने के बाद मैनेजमेंट ने यूनिवर्सिटी की ऑफिशियल वेबपोर्टल भी बंद कर दी है। साथ ही इंटरनेट से यूनिवर्सिटी से जुड़ी डिटेल्स हटाई जा रही हैं, जिससे सुरक्षा एजेंसियों का शक और गहरा गया है। राजनीतिक पहुंच का सहारा लेकर यूनिवर्सिटी बनाने का आरोप जांच एजेंसी से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक जावेद सिद्दीकी ने राजनीतिक कनेक्शन का फायदा उठाकर इस यूनिवर्सिटी को साल 2014 में तैयार किया गया था। मान्यता दिलाने में सत्तारूढ़ पार्टी के नेता की मदद मिली।
अल फलाह यूनिवर्सिटी की मान्यता से जुड़े मामले में जल्द ही हरियाणा सरकार भी एक महत्वपूर्ण बैठक करने वाली है। जानिए कौन है जावेद अहमद सिद्दीकी... ट्रस्ट का संचालन परिवार के हाथ में अल फलाह चैरिटेबल ट्रस्ट के चेयरमैन और मैनेजिंग ट्रस्टी जावेद के अलावा उनकी पत्नी शमीमा सिद्दीकी, बेटी आलिया सिद्दीकी, भाई सुफयान अहमद सिद्दीकी और साऊद अहमद सिद्दीकी ट्रस्टी हैं। रिश्तेदार उस्मा अख्तर और शीमा सिद्दीकी भी जुड़ी हुई हैं।
यह पारिवारिक नियंत्रण ट्रस्ट को मजबूत बनाता है। दुबई से यूनिवर्सिटी का लिंक ट्रस्ट से जुड़ी उस्मा अख्तर अल-फलह स्कूल ऑफ इंजीनियरिंग की गवर्निंग बॉडी की सदस्य हैं। वह वर्तमान में दुबई में रह रही हैं। उनके LinkedIn प्रोफाइल के अनुसार, वह इंटीरियर फिटिंग और कपड़ा व्यवसाय से जुड़ी हैं। एजेंसियां जांच कर रही हैं कि कहीं वित्तीय लेन-देन और नेटवर्किंग के माध्यम से दुबई में बैठकर भारत में गतिविधियों को अंजाम देने की कोशिश तो नहीं की गई।




