सोमवती अमावस्या पर पिंडारा में उमड़ी भीड़

हरियाणा के जींद में पिंडारा तीर्थ पर सोमवार को सोमवती अमावस पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने तीर्थ में स्नान कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। इस दौरान यहां पर मेला भी भरा। इसमें बच्चों के लिए खिलौनों की जमकर खरीददारी की गई। रात को ही लोगों की पांडू पिंड़ारा तीर्थ पर भीड़ लगने लगी थी।

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सोमवती अमावस्या पर पिंडारा में उमड़ी भीड़

हरियाणा के जींद में पिंडारा तीर्थ पर सोमवार को सोमवती अमावस पर हजारों की संख्या में श्रद्धालुओं ने तीर्थ में स्नान कर पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। इस दौरान यहां पर मेला भी भरा। इसमें बच्चों के लिए खिलौनों की जमकर खरीददारी की गई। रात को ही लोगों की पांडू पिंड़ारा तीर्थ पर भीड़ लगने लगी थी। सुबह स्नान शुरू हुआ। सोमवती अमावस्या का हिंदू धर्म में बहुत महत्व माना जाता है। इस दिन महादेव और मां पार्वती की विशेष पूजा और व्रत करने का विधान है। साथ ही पितरों का तर्पण किया जाता है। माना जाता है कि ऐसा करने से पितृ प्रसन्न होते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त होता है और व्रती को अखंड सौभाग्य, खुशहाली और पितरों का आशीर्वाद मिलता है। पंचांग के अनुसार सोमवती अमावस्या का शिव योग शाम छह बजकर 20 मिनट तक रहेगा।

सिद्ध योग शाम छह बजकर 20 मिनट से लेकर पूर्ण रात्रि तक रहेगा। ऐसा कहा जाता है कि इस दौरान मांगलिक कार्य करने से उनमें सफलता प्राप्त होती है और परिवार में खुशहाली आती है। सुबह ही लोग पिंडारा में स्नान के लिए पहुंचने लगे थे। इस कारण जींद-गोहाना मार्ग पर जाम की स्थिति बनी रही। ट्रैफिक व्यवस्था पूरी तरह से फेल नजर आई। 2024 में अमावस्या का तीसरा योग दिसंबर में वर्ष 2024 में सोमवती अमावस्या के पूरे साल में 3 योग की बने हैं। पहला योग 8 अप्रैल को था। दूसरा योग आज 2 सितंबर को है। इसके बाद तीसरा और अंतिम योग इस साल के अंत में 30 दिसंबर को बन रहा है।

सोमवती अमावस्या का लोगों को काफी इंतजार रहता है। पिंडारा तीर्थ का यह है महत्व पिंडतारक तीर्थ के संबंध में किदवंती है कि महाभारत युद्ध के बाद पूर्वजों की आत्मा की शांति के लिए पांडवों ने यहां 12 वर्ष तक सोमवती अमावस्या की प्रतीक्षा में तपस्या की। बाद में सोमवती अमावस के आने पर युद्ध में मारे गए परिजनों की आत्मा की शांति के लिए पिंडदान किया। तभी से यह माना जाता है कि पांडू पिंडारा स्थित पिंडतारक तीर्थ पर पिंडदान करने से पूर्वजों को मोक्ष मिल जाता है। महाभारत काल से ही पितृ विसर्जन की अमावस्या, विशेषकर सोमवती अमावस्या पर यहां पिंडदान करने का विशेष महत्व है। यहां पिंडदान करने के लिए विभिन्न प्रांतों के लोग श्रद्धालु आते हैं।

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