रोहतक मंडी में भीगी धान व बाजरे की फसल, एमएसपी से कम दाम पर बेचने को मजबूर किसान

खरीद के अभाव में आढ़ती नमी का हवाला देकर किसानों से न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) से ₹300 से ₹400 प्रति क्विंटल कम कीमत पर फसल खरीद रहे हैं, जिससे नाराज किसानों ने मार्केट कमेटी सचिव के कार्यालय पर ताला जड़कर प्रदर्शन किया है।

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रोहतक मंडी  में भीगी धान व बाजरे की फसल, एमएसपी से कम दाम पर बेचने को मजबूर किसान
हरियाणा के रोहतक जिले की नई अनाज मंडी में व्यवस्थाओं की पोल खुल गई है। मंडी में पर्याप्त शेड न होने के कारण किसानों की धान और बाजरे की फसल खुले आसमान के नीचे सड़कों पर बिखरी हुई है। इस बीच अचानक हुई बरसात ने किसानों की मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। जमीन पर पड़ी और सुखाने के लिए फैलाई गई धान व बाजरे की फसल पानी में पूरी तरह भीग गई है, जिससे किसानों और आढ़तियों दोनों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा है।
गेट पास कट रहे, पर सरकारी खरीद ठपअनाज मंडी में अपनी फसल लेकर पहुंचे किसान सुमित ने बताया कि मंडियों में धान की सरकारी खरीद की रफ्तार बेहद धीमी है।
जमींदार अपनी फसल लेकर कई दिनों से मंडी में डेरा डाले हुए हैं। अधिकारियों द्वारा फसल के गेट पास तो काटे जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में फसल की सरकारी खरीद नहीं की जा रही। शेड के नीचे जगह पूरी तरह फुल होने के कारण किसानों को मजबूरी में अपनी उपज खुले में रखनी पड़ रही है, जो अब बारिश के कारण खराब हो रही है।
सरकार की तरफ से इस सीजन के लिए पीआर धान का मूल्य ₹2,461 प्रति क्विंटल और बाजरे का न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) ₹2,900 प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। लेकिन किसानों का आरोप है कि सरकारी खरीद एजेंसियां खरीद नहीं कर रही हैं और प्रशासनिक अधिकारी फसल में नमी अधिक होने का बहाना बना रहे हैं। इस मजबूरी का फायदा उठाकर स्थानीय आढ़ती किसानों से धान और बाजरे को सरकारी रेट से ₹300 से ₹400 प्रति क्विंटल कम दाम पर खरीद रहे हैं। किसानों को अपनी लागत निकालने के लिए औने-पौने दामों पर फसल बेचने को मजबूर होना पड़ रहा है।
मार्केट कमेटी ऑफिस पर जड़ा ताला, पर्याप्त शेड की मांग
फसल की खरीद न होने और बदइंतजामी से परेशान गुस्साए किसानों ने बीते दिन रोहतक मार्केट कमेटी सचिव के कार्यालय पर ताला जड़ दिया और सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। हालांकि, प्रशासनिक अधिकारियों ने जल्द खरीद शुरू करने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसान अभी भी अपनी फसल के बिकने का इंतजार कर रहे हैं।
किसान नेता प्रीत सिंह और बलवान ने सरकार से मांग की है कि अनाज मंडियों में किसानों की फसल को सुरक्षित रखने के लिए पर्याप्त शेड का निर्माण कराया जाए। उन्होंने कहा कि गेहूं के सीजन में भी ऐसे ही हालात रहते हैं और अब धान-बाजरे के समय भी अधिकारियों की लापरवाही के कारण अन्नदाता को दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।