रामपाल बोला- प्रेमानंद महाराज कुछ नहीं, जीरो ज्ञान है:कहा- कृष्ण नाम छोड़कर 'राधा-राधा' बुलवा रहा; शास्त्र के खिलाफ साधना करा रहा, मोक्ष नहीं मिलेगा
हत्या और देशद्रोह के मामले में जेल से छूटे संत रामपाल ने प्रेमानंद महाराज पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। रामपाल ने उन्हें अज्ञानी बताते हुए कहा- ‘वह कृष्ण नाम छोड़कर लोगों से राधा-राधा नाम बुलवा रहा है। वो कुछ नहीं हैं, उसके पास जीरो ज्ञान है।
हत्या और देशद्रोह के मामले में जेल से छूटे संत रामपाल ने प्रेमानंद महाराज पर आपत्तिजनक टिप्पणी की है। रामपाल ने उन्हें अज्ञानी बताते हुए कहा- ‘वह कृष्ण नाम छोड़कर लोगों से राधा-राधा नाम बुलवा रहा है। वो कुछ नहीं हैं, उसके पास जीरो ज्ञान है। प्रेमानंद महाराज शास्त्र विरुद्ध साधना बता रहे हैं और उन्हें शास्त्रों का ज्ञान नहीं है।' रामपाल ने मेडिकल साइंस का उदाहरण देते हुए कहा, ‘शरीर का रोग सही दवाई से ही ठीक होता है। अगर कोई डॉक्टर गलत दवाई दे रहा हो तो बीमारी कैसे ठीक होगी? ठीक उसी तरह अध्यात्म में भी गलत साधना से मोक्ष नहीं मिल सकता।
एक डॉक्टर दूसरे की गलत दवाई देखकर बता सकता है कि यह गलत है।’ श्रीमद्भगवद्गीता के श्लोकों का उदाहरण रामपाल के सोशल मीडिया पेज ‘स्प्रीच्युअल लीडर संत रामपाल’ पर भी एक वीडियो पोस्ट किया गया है। इसमें रामपाल ने अपने तर्कों के समर्थन में श्रीमद्भगवद्गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 और 24 का संदर्भ दिया। उसने कहा कि गीता के अध्याय 16 के श्लोक 23 में स्पष्ट लिखा है कि जो व्यक्ति शास्त्र विधि को त्यागकर अपनी इच्छा से भक्ति या साधना करता है, उसे न तो सुख मिलता है, न सिद्धि प्राप्त होती है और न ही परम गति यानी मोक्ष मिलता है। वहीं, अध्याय 16 के श्लोक 24 के अनुसार, क्या कर्तव्य है और क्या अकर्तव्य, इसके निर्धारण के लिए शास्त्र ही प्रमाण हैं। नाम जाप से ही होगा मोक्ष रामपाल ने कहा कि भक्ति का मूल आधार केवल ‘नाम जाप’ है।
उसने गुरु नानक देव जी की वाणी का उदाहरण देते हुए कहा, "नानक नाम चढ़दी कला, तेरे भाणे सरबत दा भला।" केवल शास्त्रों में बताए गए सही नाम जाप से ही जीव का कल्याण और मोक्ष संभव है। सही शास्त्रानुकूल साधना के बिना कोई भी गति संभव नहीं है। इससे पहले भगवान श्रीराम पर सवाल उठाया रामपाल ने करीब एक महीना पहले राम मंदिर चढ़ावा चोरी और भगवान श्रीराम पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। तब BJP प्रवक्ता नेहा धवन रामपाल से मिलने धनाना आश्रम गई थीं, जहां रामपाल ने कहा कि अयोध्या मंदिर में सिर्फ मूर्ति है, वो भगवान नहीं हैं। रामपाल ने कहा था कि हमारे धर्मगुरु आजतक हमें मूर्ख बना रहे हैं। ये कहते हैं कि हमने मूर्ति में प्राण प्रतिष्ठा कर दी। अब यह मूर्ति भगवान वाला काम करेगी।
अगर इनकी प्राण प्रतिष्ठा वाली क्रिया ठीक होती, तो श्रीराम वहां मौजूद थे और प्राण प्रतिष्ठित थे। उनके हाथ में तीर कमान भी था। एक तीर से रावण को मार दिया था। अगर सही में प्राण होते तो चोरी होती ही नहीं। इससे यही बात सिद्ध होती है यह लोगों को मूर्ख बना रहे हैं। इतने पढ़ने के बावजूद लोग इनके पीछे लग रहे हैं। सतलोक आश्रम संचालक रामपाल से जुड़े 2 विवाद जानिए... करौथा आश्रम विवाद-2006: रामपाल द्वारा स्वामी दयानंद सरस्वती की पुस्तक 'सत्यार्थ प्रकाश' पर की गई टिप्पणियों को लेकर आर्य समाजियों और रामपाल के अनुयायियों के बीच हिंसक झड़पें हुईं, जिसमें एक व्यक्ति की मौत हो गई।
इसी मामले में पहली बार जेल जाना पड़ा था। बरवाला आश्रम हिंसा और गिरफ्तारी-2014: 2006 के हत्या के मामले में कोर्ट में पेश न होने पर पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने रामपाल के खिलाफ वारंट जारी किया। हिसार के बरवाला स्थित उसके आश्रम में नवंबर 2014 में पुलिस और समर्थकों के बीच खूनी संघर्ष हुआ। इस दौरान आश्रम के भीतर 5 महिलाओं और एक बच्चे की मौत हो गई थी।
11 साल बाद जमानत पर जेल से छूटा सतलोक आश्रम का प्रमुख रामपाल 11 साल, 4 महीने और 24 दिन जेल में बिताने के बाद 10 अप्रैल 2026 को हिसार की सेंट्रल जेल से रिहा हुआ था। पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आया और सोनीपत के धनाना स्थित सतलोक आश्रम पहुंचा था। तब से लेकर अब तक वह धनाना आश्रम में है। बरवाला कांड के बाद पुलिस ने रामपाल, उनके भाई और अन्य समर्थकों पर देशद्रोह, हत्या और आपराधिक साजिश रचने जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। इन मामलों में उन्हें 2018 में उम्रकैद की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, 2025 में पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय ने उम्रकैद की सजा को निलंबित कर दिया और बाद में उसे देशद्रोह से संबंधित मामलों में भी जमानत हो गई थी।




