हरियाणा के रोहतक शहर और आसपास के इलाकों में वायु प्रदूषण ने एक बार फिर विकराल रूप ले लिया है। त्योहारों और सर्दियों की दस्तक के साथ ही शहर की आबोहवा दमघोंटू हो गई है। विभिन्न एयर क्वालिटी ट्रैकिंग प्लेटफॉर्म्स के अनुसार, रोहतक का वायु गुणवत्ता सूचकांक आज 220 से 295 के बीच दर्ज किया गया है। केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के मानकों के मुताबिक यह स्थिति "गंभीर" और स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक श्रेणी में आती है।
PM2.5 का स्तर सामान्य से कई गुना अधिक
पर्यावरण विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय रोहतक की हवा में सबसे खतरनाक प्रदूषक तत्व PM2.5 और PM10 बने हुए हैं:
PM2.5 की मात्रा: हवा में सूक्ष्म कणों (PM2.5) का स्तर 201 से 217 µg/m³ तक पहुंच गया है, जो सुरक्षित सीमा से कई गुना ज्यादा है। ये बारीक कण सीधे फेफड़ों में जाकर खून में मिल जाते हैं।
PM10 की मात्रा: मोटे धूल कणों (PM10) का स्तर भी 250 से 280 µg/m³ के खतरनाक आंकड़े को छू रहा है।
शहर के मुख्य केंद्रों जैसे महर्षि दयानंद यूनिवर्सिटी में AQI 261 और पॉश इलाके मॉडल टाउन में AQI 270 के पार रिकॉर्ड किया गया है, जिससे पूरा शहर धुंध की चपेट में है।
क्यों गैस चैंबर बना रोहतक?
हर साल अक्टूबर के महीने में रोहतक की हवा बिगड़ने के पीछे चार मुख्य कारण सामने आ रहे हैं:
पराली का धुआं: पंजाब और हरियाणा के पड़ोसी जिलों में धान की कटाई के बाद खेतों में जलाई जा रही पराली का धुआं हवा के रुख के साथ रोहतक पहुंच रहा है।
धीमी हवा और मौसम: सर्दियों की शुरुआत के कारण हवा की रफ्तार कम हो गई है, जिससे धुआं और धूल के कण ऊपर आसमान में जाने के बजाय जमीन के पास ही थमे हुए हैं।
स्थानीय प्रदूषण: शहर में वाहनों का भारी दबाव और बिना ढके चल रहे निर्माण कार्य लगातार धूल उड़ा रहे हैं।
डॉक्टरों की चेतावनी: रहें सावधान
रोहतक पीजीआई और स्थानीय डॉक्टरों ने बढ़ते प्रदूषण को देखते हुए हेल्थ एडवाइजरी जारी की है। सांस के मरीजों, बुजुर्गों और बच्चों को सुबह-शाम घर से बाहर न निकलने की सलाह दी गई है।
प्रदूषण से बचने के लिए लोगों को N95 मास्क का उपयोग करने, घरों की खिड़कियां बंद रखने और आंखों में जलन होने पर तुरंत ठंडे पानी से धोने की हिदायत दी गई है।