रेट्रोग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी के जरिए बिना चीरा-टांका लगाए मरीज की किडनी से निकाली जा रही पथरी

फौज में शामिल होने के लिए तैयारी करने वाले वे युवा जिनकी किडनी में पथरी है और वो भर्ती के दौरान मेडिकल फिट सर्टिफिकेट न दिखा पाने से सेना जाॅइन नहीं कर पाते हैं। ऐसे युवाओं को अब निराश होने की जरूरत नहीं है...

रेट्रोग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी के जरिए बिना चीरा-टांका लगाए मरीज की किडनी से निकाली जा रही पथरी
रेट्रोग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी के जरिए बिना चीरा-टांका लगाए मरीज की किडनी से निकाली जा रही पथरी

रोहतक (विवेक मिश्र).फौज में शामिल होने के लिए तैयारी करने वाले वे युवा जिनकी किडनी में पथरी है और वो भर्ती के दौरान मेडिकल फिट सर्टिफिकेट न दिखा पाने से सेना जाॅइन नहीं कर पाते हैं। ऐसे युवाओं को अब निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि प्रदेश के सरकारी अस्पतालों में एकमात्र पीजीआई के यूरोलॉजी विभाग में किडनी में पथरी निकालने की सर्जरी रेट्रोग्रेड इंट्रा रीनल तकनीक के जरिए की जा रही है।

 

इस तकनीक के जरिए बिना चीरा टांका लगाए मरीज की किडनी से पथरी निकालकर उन्हें दो दिन में स्वस्थ करने का दावा किया गया है। यूरोलोजी विभागाध्यक्ष डॉ. देवेंद्र सिंह पंवार ने बताया कि संस्थान में हाल ही में रेट्रोग्रेड इंट्रा रीनल सर्जरी की शुरुआत की गई है।

 

यह एक ऐसी सर्जरी है, जिसमें मरीज को कोई भी चीरा या टांका नहीं लगाया जाता और मरीज सर्जरी के अगले ही दिन अपने घर जा सकता है। एचओडी डॉ. देवेंद्र पंवार व उनकी टीम में शामिल चिकित्सक डॉ. जीवन, डॉ. मृंगाक व डॉ. दीपक इस सर्जरी को सफलता पूर्वक कर रहे हैं।

 

ऐसे होती है सर्जरी
यूराेलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. देवेंद्र सिंह ने बताया कि इस तकनीक में किडनी की पथरी को निकालने के लिए रेनोस्कोप को पेशाब के रास्ते से किडनी तक पहुंचाया जाता है और लेजर पथरी के टुकड़े-टुकड़े करके बाहर निकाल देता है। इस तकनीक से मरीज को कोई भी चीरा या टांका नहीं लगाना पड़ता, जिसके चलते मरीज अगले दिन घर जा सकता है और उसके अगले दिन अपनी सामान्य दिनचर्या में शामिल हो सकता है।

 

सप्ताह में तीन दिन संचालित हो रही ओपीडी
एचओडी डॉ. देवेंद्र पंवार ने कहा, इस तकनीक को संस्थान में शुरू करने में कुलपति डॉ. ओपी कालरा, कुलसचिव डॉ. एचके अग्रवाल, निदेशक डॉ. रोहताश यादव की बड़ी भूमिका रही है। मरीजों को इलाज उपलब्ध कराने के लिए सप्ताह के हर मंगलवार, गुरुवार व शनिवार को ओपीडी क्लीनिक संचालन किया जा रहा है।

 

इन तकनीकों से भी होता है इलाज

ईएसडब्लूएल : इस तकनीक में मरीजों की एक से डेढ़ सेंटीमीटर की पथरी को शॉक वेव के माध्यम से बिना किसी चीरे या टांके के खत्म किया जाता है।
पीसीएनएल : इसमें दूरबीन की मदद से छेद करके कितने भी बड़े साइज की पथरी को निकाला जाता है।
मिनी पिसीनल : इस तकनीक में बहुत पतली दूरबीन व बहुत ही मुहिम छेद द्वारा किडनी से पथरी निकाली जाती है। परंतु इसमें एक सेंटीमीटर तक की पथरी निकलती है और इसमें एक टांका भी लगाना पड़ता है।