जापानी युवती को अंजान शख्स ने दी थी श्रीमद्भगवत गीता, माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर पढ़ाने लगीं भारतीय दर्शन

कुरुक्षेत्र में युद्ध भूमि पर एक तरफ परिवार और दूसरी ओर रिश्तेदारों को देख जब अर्जुन व्यथित हुए तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान देते हुए कहा था...

जापानी युवती को अंजान शख्स ने दी थी श्रीमद्भगवत गीता, माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर पढ़ाने लगीं भारतीय दर्शन
जापानी युवती को अंजान शख्स ने दी थी श्रीमद्भगवत गीता, माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर पढ़ाने लगीं भारतीय दर्शन
जापानी युवती को अंजान शख्स ने दी थी श्रीमद्भगवत गीता, माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर पढ़ाने लगीं भारतीय दर्शन

कुरुक्षेत्र। कुरुक्षेत्र में युद्ध भूमि पर एक तरफ परिवार और दूसरी ओर रिश्तेदारों को देख जब अर्जुन व्यथित हुए तो भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें श्रीमद्भगवत गीता का ज्ञान देते हुए कहा था-

सर्वधर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वा सर्वपापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुचः॥

यानी अपनी सब सोच त्याग कर मेरी शरण में आ जाओ। मैं तुम्हारे सारे पाप नष्ट करके तुम्हें मोक्ष प्रदान करूंगा। भटकों को नई राह दिखाने वाले पवित्र ग्रंथ श्रीमद्भगवत गीता ने जापान की एक युवती का भी जीवन पूरी तरह से बदल दिया। गीता ने टोक्यो में रहने वाली रीको वाथाबे के जीवन पर ऐसी छाप छोड़ी कि वह माइक्रोसॉफ्ट की नौकरी छोड़कर अब जापान में गीता और भारतीय दर्शन पढ़ाने लगी हैं।

 

गीता पढ़कर भगवान श्रीकृष्ण के बारे में बढ़ी थी जिज्ञासा

रीको वाथाबे को किसी अंजान शख्स ने गीता भेंट की थी। उस समय वह माइक्रोसॉफ्ट में ट्रांसलेटर का जॉब करती थीं। श्रीमद्भगवत गीता पढ़कर रीको का जीवन पूरी तरह से बदल गया। उन्होंने बताया कि स्कूली पढ़ाई पूरी करने के बाद उसने कानागावा कॉलेज ऑफ फॉरेन स्टडीज में पढ़ाई की। फिर अंग्रेजी और कॉमर्स की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड चली गई।

वहां पढ़ाई पूरी करने के बाद इंग्लैंड लोकल गवर्नमेंट के साथ बतौर ट्रेनी जुड़ी। कुछ दिन ट्रेनिंग की और वापस जापान आ गई। जापान में बतौर जापानी व इंग्लिश ट्रांसलेटर की माइक्रोसॉफ्ट और फूजी जैसी कंपनियों के लिए काम किया। इसी दौरान एक दिन टोक्यो रेलवे स्टेशन पर एक अंजान शख्स ने उसे श्रीमद्भगवत गीता दी, जिस पर भगवान श्रीकृष्ण की फोटो छपी थी। गीता जापानी भाषा में थी, इसलिए इसे पढ़ा। पढ़ने के बाद वह बहुत प्रभावित हुई। उनके मन में भगवान श्रीकृष्ण व अन्य धार्मिक ग्रंथों के बारे में जानने की इच्छा हुई।

 

भारतीय से परिवार वाले खिलाफ लव मैरिज
रीको ने बताया कि टोक्यो डिजनी के दौरान उसकी मुलाकात दिल्ली के रहने वाले मुकेश से हुई। मुकेश भारत से गारमेंट्स इंपोर्ट कर उन्हें जापान में सेल करते थे। डिजनी में पास-पास टेबल होने की वजह से दोनों में बातचीत हुई। इसके बाद आगे की मुलाकातों का सिलसिला शुरू हुआ और फिर अकसर मिलने लगे। फोन पर बात होने लगी। मुकेश की जापानी इतनी अच्छी नहीं थी

लेकिन रीको ने उसे जापानी सिखा दी। मुकेश और रीको ने शादी करने का फैसला किया लेकिन दोनों के माता-पिता इसके खिलाफ थे। मुकेश ने अपने परिवार वालों को मना लिया लेकिन रीको के परिवार वाले नहीं माने। इसके बावजूद रीको और मुकेश ने साल 2000 में शादी कर ली। शादी दिल्ली में भारतीय रीति रिवाज से हुई। रीको अकेली भारत आई। 2005 में उसे बेटा हुआ तो रीको के परिवार वालों ने शादी को स्वीकार कर लिया। वह गीता से इतनी प्रभावित थी की उसने अपने बेटे का नाम अर्जुन रखा।

 

ट्रांसलेटर का काम छोड़ भारतीय दर्शनशास्त्र को जाना, अब जापान में पढ़ा रही
शादी के बाद रीको टोक्यो में मुकेश के साथ रहने लगी। उसने मुकेश से भारतीय दर्शनशास्त्र के बारे में पूछा तो उन्होंने उड़ीसा के भुवनेश्वर में रहने वाले गुरु एमके पांडा से मिलवाया। रीको ने गुरु पांडा के पास गीता, वेद, योग व भारतीय दर्शनशास्त्र का अध्ययन किया।

उसने फैसला किया कि वह जापान में रहकर इसे ही प्रचारित करेगी। इसके बाद उसने नौकरियों से अलविदा कह दिया और जापान में गीता, वेद, रामायण का ज्ञान बांटना शुरू कर दिया। अब वे अलग-अलग जगह चल रहे योगा इंस्टीट्यूट में गीता व भारतीय दर्शनशास्त्र पढ़ा रही हैं। रीको गीता और महाभारत की पुस्तक हमेशा अपने साथ रखती हैं।

 

जापान में बहुत लोग जुड़े हैं योग और गीता से
रीको कहती हैं कि जापान में करीब 7.7 मिलियन लोग योग से जुड़े हुए हैं। अलग-अलग इंस्टीट्यूट में योग के साथ-साथ गीता, महाभारत, रामायण व अन्य वैदिक ग्रंथों का ज्ञान दिया जाता है। अकेले टोक्यो में करीब 150 योगा इंस्टीट्यूट हैं। इस्कॉन जैसी संस्थाएं गीता के प्रचार प्रसार के लिए जापान में भी काम कर रही हैं। गीता का जापानी में सरल अनुवाद महज 200 रुपये में मिल जाता है। इसी तरह महाभारत का जापानी अनुवाद भी आसानी से मिल जाता है।

 

source:bhaskar