सियासी उठापटक से भरा रहा साल; 10 में से 8 मंत्री हारे, फिर भी सत्ता में आई भाजपा, इनेलो से बेदखल दुष्यंत बने डिप्टी सीएम

साल 2019 हरियाणा के लिए सबसे बड़ा सियासी उठापटक वाला साल रहा। इस साल जींद उपचुनाव से प्रदेश में सियासी सर्गर्मियां शुरू हुई थी...

सियासी उठापटक से भरा रहा साल; 10 में से 8 मंत्री हारे, फिर भी सत्ता में आई भाजपा, इनेलो से बेदखल दुष्यंत बने डिप्टी सीएम
सियासी उठापटक से भरा रहा साल; 10 में से 8 मंत्री हारे, फिर भी सत्ता में आई भाजपा, इनेलो से बेदखल दुष्यंत बने डिप्टी सीएम

पानीपत। साल 2019 हरियाणा के लिए सबसे बड़ा सियासी उठापटक वाला साल रहा। इस साल जींद उपचुनाव से प्रदेश में सियासी सर्गर्मियां शुरू हुई थी, जो साल के अंत तक विधानसभा चुनाव के बाद खत्म हुई। इस बीच सत्ताधारी दल भाजपा, कांग्रेस, इनेलो और जजपा में इतना उतार-चढाव आया कि इस वर्ष को सभी पार्टियों के लिए यादगार बना दिया।

हरियाणा ने भाजपा को पिछली बार की तरह बहुमत नहीं दिया, फिर भी पार्टी ने अपनी सरकार बना ली। इनेलो से बेदखल हुए दुष्यंत चौटाला ने 10 महीने पहले अपनी पार्टी बनाई और राज्य के उप मुख्यमंत्री बने।

  1. 2019 के पहले महीने में हुए जींद उपचुनाव में भाजपा के उम्मीदवार कृष्ण मिड्‌ढा ने 12 हजार से ज्यादा वोटों से जजपा प्रत्याशी दिग्विजय चौटाला को हराकर कमल खिलाया। यहां उनकी टक्कर में दिग्विजय चौटाला के साथ-साथ कांग्रेस के राष्ट्रीय प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला सेथी। कृष्ण मिड्ढा के पिता डॉ. हरिचंद मिड्ढा की मृत्यु के बाद खाली हुई इस सीट पर चुनाव हुआ था, जो इनेलो ने गंवा दी और इस जीत से भाजपा को ताकत मिली।

  2. 12 मई को हरियाणा में हुए लोकसभा चुनाव ने सब को चौंका दिया। इस चुनाव में दिग्गज नेताओं को धूल चाटनी पड़ी और भाजपा ने प्रचंड जीत हासिल करते हुए सभी 10 सीटें जीत ली। पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा सोनीपत से चुनाव हार गए तो उनके बेटे दीपेंद्र हुड्डा रोहतक से हार गए। रोहतक में तो कांटे के मुकाबले में तीन बार के कांग्रेस सांसद दीपेंद्र हुड्‌डा से भाजपा के डॉ. अरविंद शर्मा लगभग 7503 वोट से जीत गए। रात 2 बजे तक काउंटिंग चलती रही। अलसुबह 4 बजे डीसी ने अरविंद शर्मा की जीत घोषित की।

  3. मई 2019 के लोकसभा चुनाव से पहले ऐसी हालत थी कि रत्नलाल कटारिया के सामने विज का सवाल भी पूछ लेते थे तो वे भड़क जाते थे। लेकिन, चुनाव आते ही दोनों साथ-साथ आ गए। चुनाव में विज भी रत्नलाल कटारिया के साथ कदमताल मिलाते नजर आए। उन्होंने कटारिया के लिए वोट मांगे।

  4. लोकसभा चुनाव में मिली प्रचंड जीत के बाद विधानसभा चुनाव से ठीक पहले सितंबर महीने में हरियाणा के सीएम ने प्रदेशभर में जन आशीर्वाद यात्रा निकाली। इसी दौरान उनका एक वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ, जिसमें वे अपने पीछे खड़े डॉ. हर्ष मोहन भारद्वाज को कह रहे थे कि मैं तेरी गर्जन काट दूंगा। सीएम जन आशीर्वाद यात्रा के दौरान पहले कार्यकर्ताओं द्वारा भेंट किया गया एक फरसा लेते हैं, इसके बाद उनके पीछे खड़े नेता डॉ. हर्ष मोहन भारद्वाज द्वार मुकुट पहनाए जाने से नाराज हो जाते हैं और उसे कहते हैं कि मैं तेरी गर्दन काट दूंगा। चुनाव में यह उनके खिलाफ इस्तेमाल किया गया।

  5. जून2019 में करनाल में आयोजित कार्यकर्ता सम्मान समारोह में मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्‌टर के साथ सेल्फी ले रहे एक कार्यकर्ता पर सीएम गुस्सा हो गए। कार्यकर्ता के मोबाइल को सीएम ने हाथ मारकर झिड़क दिया और उसे बाहर निकलने का इशारा किया। मुख्यमंत्री की इस नाराजगी को देखकर कार्यकर्ता हक्का-बक्का रह गया और चुपचाप वहां से चला गया। सीएम का यह वीडियो सोशल मीडिया पर जमकर वायरल हुआ।

  6. अगस्त 2019 में विधानसभा चुनाव से ठीक पहले पूर्व सीएम भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने बगावती सुर अपना कर लिए थे। उन्होंने रोहतक में महापरिवर्तन रैली कर ऐलान कर दिया था कि वह कांग्रेस के बंधन से मुक्त होकर आया हूं। उन्होंने एक कमेटी का ऐलान किया था, जो यह तय करती की हुड्डा कांग्रेस में रहेंगे या अपनी अलग राह अपनाएंगे। इससे पहले ही कांग्रेस आलाकमान ने उन्हें नेता प्रतिपक्ष के साथ-साथ विधानसभा चुनाव की जिम्मेदारी दे दी थी।

  7. विधानसभा चुनाव से ठीक पहले अक्टूबर 2019 में प्रदेशाध्यक्ष की कुर्सी छिन जाने पर अशोक तंवर बागी हो गए। उन्होंने कांग्रेस से बगावत की और कांग्रेस में टिकट वितरण पर सवाल खड़े करते हुए दिल्ली में सोनिया गांधी के आवास पर प्रदर्शन किया। यहां अपने समर्थकों को संबोधित किया। उन्होंने चुनाव में अलग-अलग दलों के उम्मीदवारों का समर्थन भी किया लेकिन उनकी बगावत काम नहीं आई। पार्टी ने उनको भाव नहीं दिया और प्रदेशाध्यक्ष सैलजा को तो चुनाव की कमान भूपेंद्र सिंह हुड्डा को सौंप दी।

  8. हरियाणा में विधानसभा चुनाव की टिकट कटते ही संपत सिंह ने कांग्रेस छोड़ दी। इससे पहले उन्होंने इनेलो छोड़ी थी। उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री भजन लाल के बेटे कुलदीप बिश्नोई पर सीधे निशाना साधा और कहा, जिस परिवार को चुनावों में मैंने पटखनी दी थी, उसी परिवार ने मेरी टिकट कटवा दी।' कांग्रेस छोड़कर वे भाजपा में आ गए और शाह की मौजूदगी में भाजपा का दामन थामा। विधानसभा चुनाव में भाजपा के लिए वोट मांगे।

  9. विधानसभा चुनाव में भाजपा के दिग्गज नेता चुनाव हार गए। भाजपा के 10 मंत्रियों में से 8 चुनाव हार गए। इसमें कैप्टन अभिमन्यु, रामबिलास शर्मा, कविता जैन, ओमप्रकाश धनखड़, कृष्णलाल पंवार, कृष्ण बेदी, मनीष ग्रोवर और कर्णदेव काम्बोज चुनाव हार गए। भाजपा ने 40 सीटें, कांग्रेस ने 31 सीटें, जजपा ने 10 सीटें, इनेलो ने 1, हलोपा ने 1 और 7 आजाद ने चुनाव जीता। भाजपा ने आजाद उम्मीदवारों व जजपा के साथ मिलकर सरकार बना ली।

  10. विधानसभा चुनाव के नतीजे आते ही भाजपा की सांसद सुनीता दुग्गल सिरसा और रानियां की सीट से चुनाव जीतने वाले गोपाल कांडा और रणजीत सिंह को प्लेन में बैठाकर दिल्ली लेकर पहुंच गई। कांडा ने समर्थन का ऐलान कर दिया। उन्हें सरकार में पद मिलने की पूरी आस थी लेकिन इससे पहले ही मीडिया ने उनसे जुड़े पुराने मामले उठा दिए, जिसके बाद भाजपाने कांडा का समर्थन लेने से इनकार कर दिया और वे सरकार का हिस्सा बनते बनते रह गए।



       
    source:dainik bhaskar